कृत्तिका वर और स्वाति वधू: गुण मिलान
पारंपरिक अष्टकूट स्कोर जब वर का चंद्रमा कृत्तिका में और वधू का चंद्रमा स्वाति में हो।
इनमें से एक नक्षत्र दो राशियों में फैला है, इसलिए स्कोर राशि पर निर्भर करता है। हर संयोजन दिखाया गया है।
| वर का चंद्रमा | वधू का चंद्रमा | अंक |
|---|---|---|
| कृत्तिका · मेष | स्वाति · तुला | 17.5/36 |
| कृत्तिका · वृषभ | स्वाति · तुला | 12.5/36 |
पारंपरिक कुंडली स्कोर
17.5/36
18 से कम: पारंपरिक रूप से कम स्कोर माना जाता है।
यह शुरुआत है, फ़ैसला नहीं। 36 गुण सिर्फ़ चंद्रमा को देखते हैं। पहले नाड़ी और भकूट देखें; दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव और नवांश किसी एक संख्या से ज़्यादा मायने रखते हैं।
पहले नाड़ी देखिए, फिर भकूट, और उसके बाद कुल स्कोर। अगर दोनों साफ़ हैं तो 18/36 भी काम का है।
मेष · तुला
सटीक जन्म विवरण से जाँचेंउल्टा: स्वाति वर और कृत्तिका वधूपारंपरिक परिहार (निवारण)
- नाड़ी में 0 अंक हैं और कोई सामान्य परिहार लागू नहीं होता। इसे शांति से समझें। परंपरा मानने वाले परिवार आमतौर पर ज्योतिषी से इस पर बात करते हैं।
परिहार के नियम परंपराओं में अलग-अलग हैं (नियम-संस्करण parihara-1.0, विशेषज्ञ समीक्षा बाक़ी)। ऊपर का मूल स्कोर नहीं बदला गया है।
कूट-वार विवरण
वर्ण · आध्यात्मिक स्वभाव
वर: क्षत्रिय · वधू: शूद्र
1/1
चंद्र राशि के पारंपरिक वर्ण की तुलना करता है। वर का वर्ण वधू के बराबर या ऊँचा हो तो 1 अंक।
वश्य · आपसी आकर्षण और प्रभाव
वर: चतुष्पद · वधू: मानव
1/2
चंद्र राशियों को पाँच प्रकारों (मानव, चतुष्पद, जलचर, वनचर, कीट) में बाँटकर उनके संबंध के अंक देता है।
तारा · जन्म नक्षत्र का तालमेल
वर: कृत्तिका · वधू: स्वाति
1.5/3
एक-दूसरे के नक्षत्र तक गिनती करता है। तीसरी, पाँचवीं या सातवीं तारा पारंपरिक रूप से प्रतिकूल मानी जाती है।
योनि · शारीरिक स्वभाव
वर: मेष · वधू: महिष
3/4
हर नक्षत्र का एक पशु प्रतीक होता है। एक जैसे या मित्र पशु ज़्यादा अंक देते हैं; स्वाभाविक शत्रु 0।
ग्रह मैत्री · मानसिक मित्रता
वर: मंगल · वधू: शुक्र
3/5
दोनों चंद्र राशियों के स्वामी ग्रहों की मित्रता की तुलना करता है।
गण · स्वभाव
वर: राक्षस · वधू: देव
1/6
हर नक्षत्र देव, मनुष्य या राक्षस गण का होता है। मिलते-जुलते गण ज़्यादा अंक देते हैं।
भकूट · परिवार और समृद्धि
वर: मेष · वधू: तुला
7/7
चंद्र राशियों के बीच की दूरी देखता है। 2/12, 5/9 और 6/8 स्थिति में 0; बाकी में 7 अंक।
नाड़ी · स्वास्थ्य और वंश
वर: अंत्य · वधू: अंत्य
0/8
हर नक्षत्र आदि, मध्य या अंत्य नाड़ी का होता है। एक ही नाड़ी में 0 अंक (पारंपरिक रूप से नाड़ी दोष); अलग नाड़ी में 8।
आधे अंक क्यों? तारा हर दिशा में 1.5 अंक देता है, और वश्य व ग्रह मैत्री 0.5 अंक दे सकते हैं, इसलिए 28.5 जैसा स्कोर सामान्य और सटीक है।
यह पारंपरिक ज्योतिषीय जानकारी है। यह नहीं बताती कि विवाह सफल होगा या नहीं, और किसी रिश्ते को स्वीकार या मना करने का यह अकेला कारण नहीं होना चाहिए।
सच्चा 36/36 बहुत दुर्लभ है। अगर कोई साइट बार-बार 36/36 दिखाती है, तो उसकी गणना शायद ग़लत है, या दो नाम एक ही अक्षर-समूह में आ गए।
यहाँ इनका मूल्यांकन नहीं होता: मांगलिक परिहार, दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव और नवांश, और क्षेत्रीय भिन्नताएँ। अगर ये आपके परिवार के लिए ज़रूरी हैं तो योग्य ज्योतिषी से पूछें।
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